परोपकार: मानवीय सेवा की मिसाल बना वक़्फ़ 159 शाह इनायत हुसैन

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ए आर आज़ाद

  • ज़रूरतमंदों के लिए कंबल, अलाव और खाने के इंतज़ाम में जुटा है वक़्फ़
  • युवा स्कॉलर शाह फ़ख़रे हसन दे रहे हैं इन कामों को अंजाम

दान-पुण्य जीवन का सबसे अनमोल हिस्सा है। सभी धर्मों में असहायों एवं पीड़ितों की सेवा-भाव से मदद को सर्वोत्तम माना गया है। जैन धर्म में भी ग़रीब को दान करना व भूखे को खाना खिलाना ही भगवान की असली भक्ति मानी गई है। जैन धर्म के मुनि अरहसागरजी के मुताबिक़ भगवान की भक्ति करने का सही तरीक़ा यह है कि आप किसी को ग़लत नहीं बोलें न ही किसी का ग़लत करे।

इस बात की पुष्टि एक हदीस से भी साबित होती है। एक हदीस में आया कि एक शख़्स ने नबी से पूछा कि इस्लाम का कौन सा अमल सबसे अच्छा है? तो उन्होंने फरमाया कि ग़रीबों को खाना खिलाना, और सबको सलाम करना सबसे अच्छा अमल है। इसी तरह की एक हदीस है कि जो ज़रूरतमंदों पर ख़र्च करता है, लोगों को सलाम करता है वो शख़्स ईमान वालों में से है।

इसी के मद्देनज़र भागलपुर की चर्चा लाज़मी हो जाती है। सैयद शाह इनायत हुसैन वक़्फ़ शाह मार्केट ख़लीफ़ा बाग़ भागलपुर इसी हदीस और पवित्र ग्रंथ ़कुरआन की रौशनी में ग़रीबों और ज़रूरतमंदों के लिए हर तरह के कामों को अंजाम दे रहा है।  2018 से वक़्फ़ 159 सैयद शाह इनायत हुसैन ख़लीफ़ाबाग़्ा, भागलपुर रोज़ाना सौ लोगों के खाने का प्रबंध कर रहा है।

दरअसल ़कुरआन की शिक्षा कुछ ऐसी ही है कि अगर कोई भी शख़्स इस पर ग़ौर करते हुए अमल करे तो समाज ़खुशहाल बनकर सामने होगा। ग़रीबों और असहायों की चिंता को इस्लाम में बड़ी मज़बूती के साथ दर्शाया गया है। ़कुरआन के आइनें में ये चीज़ें हमें रास्ता दिखाती हुई नज़र आती हैं। ़कुरआन में कहा गया है-यतीमों का ख़्याल रखो। मिसकीन ग़रीबों को खिलाने की तरग़ीब दो। ज़रूरतमंद को तलाश कर उनकी मदद करो। कंजूसी और फ़िज़ूल ख़र्ची से बचा करो। अपनी खै़रात लोगों को दिखाने के लिए और एहसान जताकर बर्बाद मत करो।

़कुरआन कहता है कि जो तुमसे मदद और हिफ़ाज़त और पनाह के तलबगार हो, उसकी मदद और हिफ़ाज़त करो। ़कुरआन सीख देता हुआ कहता है-अल्लाह की राह में ख़र्च करो और अपने हाथों उपकार करो। ़कुरआन में कहा गया है कि अल्लाह उपकारी लोगों को मित्र बनाता है। इसी के साथ ़कुरआन वादों को पूरा करने पर भी ज़ोर देता है।

जब हम हदीस और ़कुरआन पर ग़ौर करते हैं तो वक़्फ़ 159 सैयद शाह इनायत हुसैन का काम और लगातार कुछ न कुछ करते जाने का जज़्बा एक मिसाल के तौर पर सामने आता है। इस वक़्फ़ की ओर से रोज़ाना सौ लोगों को खाना खिलाना वह भी बिना किसी पक्ष और भेदभाव के, सबको प्रभावित कर रहा है।

वक़्फ़ सैयद शाह इनायत हुसैन वक़्फ़ 159 के नायब मोतवल्ली व खानकाह ए पीर दमड़िया के नायब सज्जादानशीं शाह फ़ख़रे आलम हसन का इस ख़िदमत के बारे में कहना है कि ख़िदमत और लोगों की सेवा से ़खुदा की रज़ा और रहमत हासिल होती है। अल्लाह ग़रीबों की मदद करने वाले पर माल व दौलत में बरकत अता फ़रमाता है।

शाह फ़ख़रे हसन का मानना है कि इस तरह की सेवा करने से दिलों में ऊपर वाला सकून अता फ़रमाता है। उनका यह भी मानना है कि इस तरह का काम हर मालदार लोगों को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव-सेवा सबसे बड़ा धर्म है। और इसके मद्देनज़र ही सबको अपनी जि़ंदगी गुज़ारनी चाहिए।

ठीक इसी तरह की बात वक़्फ़ और पीर दमड़िया के प्रमुख शाह हसन मानी करते हैं। उनका मानना है कि यह वक़्फ़ प्रारंभ से अबतक धर्म और जाति का भेद छोड़कर हर असहाय, पीड़ित और ज़रूरतमंद लोगों की ख़िदमत में अपना योगदान देता आ रहा है।

शाह हसन मानी आगे कहते हैं,- ‘‘पाक ़कुरआन में ग़रीबों को खाना खिलाने की बात कही गई है और सूफ़ी संत ने भी ऐसा करने को कहा है।’’

उन्होंने आगे कहा कि ‘‘ हम चाहते हैं कि हर धर्म के ग़रीब इस तरह अपना पेट भर सकें, इसलिए हमने खाने को भी शाकाहारी रखा है। हम अभी क़रीब 100 लोगों को रोज़ खाना खिला रहे हैं। धीरे-धीरे तादाद और आगे बढ़ाने की है।’’

दरअसल वक़्फ़ 159 सैयद शाह इनायत हुसैन उन कामों को तेज़ी से आगे बढ़ाता है, जिसमें ग़्ारीबों और मजबूरों को फायदा मिल सके। इसी सिलसिले में जाड़ें में कंबल बांटने का एक सिलसिला हो या फिर शहर के उन ख़ास इलाक़ों में, जहां ग़्ारीबों को ठंड सताती है, आग जलाने का इंतज़ाम वक्फ़ के काम का एक अहम हिस्सा बन चुका है। अभी बीते ही कुछ दिनों पहले वक़्फ़ 159 शाह इनायत हुसैन ने कड़ाके की बढ़ती ठंड के मद्देनज़र ग़रीब, असहाय एवं निर्धन लोगों के बीच 500 कंबलों का वितरण किया। और ठंड से सिकुड़ते हाथों और जमते पैरों को राहत देने के लिए भागलपुर शहर के विभिन्न इलाक़ों में अलाव की व्यवस्था का एक ऐसा मुकम्मल इंतज़ाम किया है, जिससे राहत की गरमाहट लोग महसूस कर रहे हैं। अपने इस काम की बाबत सैयद शाह फ़ख़रे आलम हसन का कहना है कि ख़ानक़ाह-ए-पीर दमड़िया का यह एक छोटा सा प्रयास है।

ग़ौरतलब है कि ख़ानक़ाह-ए-पीर दमड़िया शाह मार्केट ख़लीफ़ाबाग़ ने स्टेशन चौक, ख़लीफ़ाबाग़्ा, तातारपुर चौक,  हुसैनपुर चौक,  कचहरी चौक,  घंटाघर,  तिलकामांझी, सराय,  नाथनगर और परवत्ती जैसी जगहों पर अलाव का ख़ास इंतज़ाम किया है।

सैयद शाह फ़ख़रे हसन ने अपने और वक़्फ़ के इस कामों पर रौशनी डालते हुए कहा, ‘‘मानवता की सेवा से ही अल्लाह का फ़ज़ल-व-करम हासिल होता है। लोगों की मदद करने का जो मौक़ा मिला है, यह मेरे लिए ़खुशी की बात है। इस तरह का पुण्य-कार्य ही इंसान के काम आता है। ख़ानक़ाह-ए-पीर दमड़िया के बुज़ुर्गों ने हमेशा समाज-सेवा का काम किया है। अल्लाह से दुआ है कि इसी तरह हमेशा नेक काम करने की हमें तौफ़िक़ अता फ़रमाएं।

कंबल वितरण के मौक़े पर ख़ानक़ाह ए पीर दमड़िया शाह के सदस्य मुमताज अहसन, धीरन शाह, मिन्हाज शाह, सैयद उस्मान, सैयद साद, अब्दुल्ला शाह, सैयद मोहिउद्दीन शाह, मुहम्मद बशीर और चुन्नू आदि मौजूद थे। ’