पश्चिम बंगाल का परिणाम और उसके संदेश

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….अनुचिंतन

एस एन विनोद

 

2 मई के परिणाम ने देश के सामने एक ऐसा जनादेश प्रस्तुत किया, जिस देखकर और सुनकर लोग हतप्रभ रह गए। पश्चिम बंगाल की शेरनी और दीदी के नाम से विश्व विख्यात ममता बनर्जी ने जिस प्रकार से जीत दर्ज की, वह ऐतिहासिक विजय कहलाएगी। इस विजय की किसी मीडिया ने कल्पना तक नहीं की थी। सबका ध्यान पांच राज्यों में सर्वाधिक पश्चिम बंगाल पर ही केंद्रित था। और, सबने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बहुमत के जादुई आंकड़े से भी कम सीटें आने की भविष्यवाणी कर दी थी।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की विजय के प्रति मात्र राष्ट्रीय पाक्षिक पत्रिका ‘दूसरा मत’ ने विश्वास जताया था। पहले चरण के मतदान से लेकर आठों चरण में हुए मतदान का सटीक विश्लेषण करते हुए ‘दूसरा मत’ ने बड़ी बारीकी से बताया था कि ममता बनर्जी जीत रही हैं। और बहुमत के जादुई आंकड़े को बड़ी आसानी से पार करते हुए 205 सीट तक ला रही हैं।

इसका सीधा तात्पर्य ये था कि ममता बनर्जी के प्रति पश्चिम बंगाल में जिस तरह से बीजेपी और केंद्र सरकार के मुखिया और उनके सिपहसालारों ने एक प्रोपगंडा चलाया था। और, उस प्रोपगंडा के माध्यम से उन्हें बदनाम करने के लिए जिस प्रकार से भाईपो, तोलाबाज़ एवं आशोल बंगला जैसे जुमलों का प्रयोग  करके पश्चिम बंगाल की जनता को दिग्भ्रमित करने का प्रयत्न किया था, वे सारी योजनाएं और मनोकामनाएं बीजेपी, केंद्र     सरकार के मुखिया और गृहमंत्री की ज्यों की त्यों रह गई।      दरअसल बीजेपी यह समझने में भूल कर गई कि पश्चिम बंगाल की स्थानीय जनता और, वोटर जानते हैं कि ममता बनर्जी किस हद तक राजनीति में अपना मु़काम बनाए हुए है। और, किस हद तक बीजेपी ममता बनर्जी को बंगाल से खदेड़ने के लिए अपने स्तर को गिराने पर तुली है।

पश्चिम बंगाल के चुनाव का अपना एक सीधा गणित है। पश्चिम बंगाल के अबतक के हुए किसी भी मतदान के बाद के  उसके परिणाम पर आप दृष्टि दौरा लें, आप पाएंगे कि जब-जब वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी होती है, वहां की सरकार यथावत रहती है। और, जब-जब वोट प्रतिशत में गिरावट देखी जाती है, तब-तब विपक्ष को लाभ और सत्ता पक्ष को हानि होती है। इस परिदृश्य का आकलन बीजेपी, केंद्र सरकार के मुखिया और गृहमंत्री अमित शाह करने में गच्छा खा गएं।

इस बार भी पहले चरण की वोटिंग प्रतिशत ने साफ इशारा कर दिया था कि ममता बनर्जी की वापसी हो रही है। दूसरे चरण के मतदान ने तो और साफ कर दिया था कि ममता बनर्जी बहुमत के आंकड़े को बड़े आसानी से पार कर रही हैं। तीसरे और चौथे चरण के मतदान प्रतिशत ने भी देश को आगाह कर दिया था कि कोई भी कुछ कर ले, पश्चिम बंगाल में इस बार कोई नई बयार बहने वाली नहीं है।

इसी प्रकार से पांचवें, छठे और सातवें चरण के चुनाव में भी वोटिंग प्रतिशत में मामूली कमी के बावजूद ‘दूसरा मत’ ने अपने पूरे आकलन के बल पर चुनाव परिणाम का जो चित्र पेश किया था, वह हूबहू सही साबित हुआ। ‘दूसरा मत’ ने साफ कर दिया था कि इन सातों चरण के चुनाव, जब नतीजे में बदलेंगे तो ममता बनर्जी यानी देश की दीदी के सिर पर जीत का ताज होगा। और आठवें यानी अंतिम चरण के मतदान के बाद अपने एक्जिट पोल में ‘दूसरा मत’ ने पश्चिम बंगाल पर अपना जो सटीक विश्लेषण किया था, और, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को जो 205 सीट तक आने की संभावनाएं जताई थीं-वह सही एवं   सटीक हुई। आप कह सकते हैं कि सिर्फ और सिर्फ ‘दूसरा मत’ का ही आकलन सही हुआ।

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के डबल इंजन की जगह डबल सेंचूरी मारकर बीजेपी के दंभ को चकनाचूर कर दिया। बीजेपी के सारे के सारे स्वप्न, दिवास्वप्न ही साबित हुए। बंगाल के मतदाताओं ने बीजेपी के मंसूबों पर पानी फेर दिया। और, देश को एक संदेश दिया कि अब ममता बनर्जी केंद्र का विकल्प बन चुकी हैं।