नहीं रहे पूर्व सांसद शंभू जी

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1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से खगड़िया के सांसद थे कामेश्वर बाबू

बेगूसराय के शकरपुरा स्टेट के पहले युवराज और खगड़िया के पूर्व सांसद कामेश्वर सिंह उर्फ शंभू जी आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए। उन्होंने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली।उनका निधन हृदय गति के रुक जाने की वजह से हो गई।सरल और सहज स्वभाव के शंभू  बाबू की निधन की ख़़बर मिलते ही कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह,रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया,जयंत सिंह,आम आदमी पार्टी के विष्णु पाठक सहित अन्य राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है।सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि स्व. कामेश्वर सिंह एक कुशल राजनेता और सहृदयी समाजसेवी थे। उन्होंने खगड़िया के सांसद के रूप में स्थानीय लोगों की बहुत सेवा की थी।उनका निधन राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।

पारिवारिक विरासत से अलग होकर उन्होंने समाजसेवा के लिए पकड़ी राजनीति की राह शकरपुरा स्टेट के राजा ललितेश्वर प्रसाद सिंह की पहली संतान कामेश्वर सिंह उर्फ शंभू बाबू के पास ईश्वरीय आशीष से सुख समृद्धि में कोई कमी नहीं थी। फिर भी समाज के वंचित तबकों के उत्थान के लिए इन्होंने राजनीति का दामन थाम लिया। 1957 ई. में खगड़िया लोकसभा के रूप में अस्तित्व में आया था। वे 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से खगड़िया के सांसद निर्वाचित किए गए और 1972 तक संसदीय राजनीति में अपनी दक्षता और कुशलता का परिचय दिया। बाद में वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और 1974 से 1980 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में भी अपनी विशिष्ट राजनीतिक पहचान बनाने में सफल रहे।

उच्च शिक्षा प्राप्त शंभू बाबू कई भाषा के जानकार थे। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र रहे कामेश्वर सिंह अद्भुत और विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। सिंधिया स्कूल ऑफ़ ग्वालियर से शिक्षा प्राप्त स्व. सिंह बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी कई भाषाओं पर ज़बरदस्त पकड़ थी। और साहित्यिक मिजाज़ के धनी होने की वजह से उनमें संवेदना कूट-़कूट कर भरी हुई थी। क्षेत्रीय भाषाओं पर पकड़ होने के अलावा स्व.शंभू बाबू बहुभाषी भी थे। उत्तर भारतीय भाषा के साथ-साथ दक्षिण भारत की विभिन्न भाषाओं में वार्तालाप करने की शैली देखकर लोग दंग हो जाया करते थे। कुल मिलाकर वे चतुर्दिक प्रतिभासंपन्न व्यक्ति थे। उनकी वाकपटुता और उत्कृष्ट ज्ञान के संप्रेषण की कला के चर्चे करते लोग आज भी नहीं अघाते हैं। आध्यात्मिक और धार्मिक प्रवृत्ति के होने की वजह से स्व. शंभू बाबू में कृतज्ञता के गुण समाहित थे, जो उनके मन,वचन और कर्म में परिलक्षित हुआ करता था।

एक सांसद के रूप में उनकी छवि अच्छी थी। न केवल खगड़िया संसदीय क्षेत्र बल्कि बिहार या देश के किसी भी कोने से उनके दिल्ली आवास पर पहुंचने वाले ज़रूरतमंदों के लिए वे आशा की किरण थे। कामेश्वर बाबू एक कुशल राजनीतिज्ञ थे।

उनके निधन की खबर मिलते ही खगड़िया और बेगूसराय में शोक की लहर फैल गई। समाजसेवी रजनीकांत पाठक, बाइट कम्प्यूटर के निदेशक संजय कुमार सिंह, जि़ला पार्षद श्वेता देवी, पूर्व जि़ला पार्षद शिवजी सिंह, पूर्व मुखिया अशोक सिंह, रामायण के ज्ञाता दयानिधि प्रसाद सिंह,  शंभू कुमार, बखरी के तारानंद सिंह, क़ौमी तंजीम के ब्यूरो प्रमुख मोख़्तार अब्बासी, सन्हौली के राकेश कुमार सिंह, मानसी के सुभाष कुमार, बख्तियारपुर के कांग्रेसी नेता धीरेंद्र सिंह, संजय सिंह, असुरार अलौली से संतोष कुमार सिंह, मुम्बई से संजीव कुमार, जयपुर से परिवहन संपदा के संपादक अवनीश जैन, लुधियाना से प्रीतपाल सिंह, फगवाड़ा से आशु, धनबाद से देवनंदन सिंह, समरेश कुमार सिंह, दिल्ली से तरुण कुमार,गुरुदत्त शर्मा, ग़ाजि़याबाद से हरप्रीत सिंह आदि ने कामेश्वर बाबू के निधन को अपूरणीय क्षति बताया।