रोजे के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

697

ए आर आज़ाद

 

हम रोजे के इतिहास पर भी जाएंगे लेकिन उससे पहले हम जान लें कि रोजे के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। यानी रोजा किन चीजों से टूट जाता है। किन चीजों से मकरूह यानी कमजोर हो जाता है। और रोजा के दौरान किन-किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए?

दरअसल जिस तरह खाना और पीना हर इंसान के लिए जायज है। ठीक उसी प्रकार से पत्नी-पत्नी के आपसी संबंध भी जायज होते हैं। लेकिन रमजान एक ऐसा महीना और इबादत का लम्हा है, जिसमें कई जायज से जायज चीजों को भी रोजे के दौरान नाजायज करार दे दिया गया है। यानी जिस तरह से आप रोजे रखकर खाने और पीने जैसी जरूरी और जायज चीजों को अपने से दूर रखते हैं, उससे गुरेज करते हैं। ठीक उसी तरह से रोजे के दौरान भी आपको अपनी पत्नी से एक सम्मानजनक दूरी और स्थिति में ही बने रहने की इजाजत दी गई है। अगर आप रोजे के दौरान रोज की तरह अपनी पत्नी से ताल्लुक बनाने की कोशिश करते हैं तो आपका रोजा टूट जाता है। इसी तरह अगर आपको सिगरेट या बीड़ी या सिंंगार पीने की आदत है और रोजा रखकर इस आदत को परवान चढ़ाना चाहते हैं तो इसकी इजाजत आपको इस्लाम नहीं देता। रोजा भी इसकी इजाजत आपको नहीं देता है। अगर आप ऐसा जान बूझकर करते हैं तो आपका रोजा टूट जाएगा। हां, कभी-कभार अनजाने में आदत के मुताबिक सिगरेट सुलगा लिया मुंह में डाल लिया और अचानक ख्याल आया कि हम तो रोजे से हैं और ख्याल आते ही हाथ के सिगरेट या मुंह में पड़े सिगरेट एक ही झटके में हटा दिया तो आपका रोजा नहीं टूटा। आप इसी तरह की गफलत में खाना खा लेते हैं या पानी पी लेते हैं और जैसे झट से एहसास होता है कि आप रोजे से हैं और तुरंत उस हरकत को बंद कर देते हैं तो आपका रोजा नहीं टूटेगा। जिन्हें पान, सिंगार, सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू और शिखर व गुटके जैसी चीजें खाने की आदत हों, उन्हें बड़े सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि ये सारे ऐसे आमाल हैं जो आपकी इबादत में खलल ही नहीं डालते बल्कि आपके रोजे को शहीद कर सकते हैं। इसलिए इन चीजों की आदत और लत वाले लोगों को चाहिए कि इस पाक महीने रमजान में यह अहद करने की कोशिश करें कि वह न तो रमजान में अब इन चीजों का इस्तेमाल करेंगे और न ही आने वाले दिनों में इस अमल के गुलाम बनकर रहेंगे। जाहिर है अगर तीस दिन आपने इस पर काबू कर लिया तो आप किसी भी नशे के शिकार से बच जाएंगे और आप खुद इबादत से नशे को अपना शिकार बनाने में कामयाब हो जाएंगे।

बहुत से लोगों में रोजे के दौरान क्या करना चाहिए नहीं करना चाहिए को लेकर अक्सर मन बेचैन रहता है। इस बात को गांठ बांध लीजिए। कहीं नोट कर लीजिए या जहन की डायरी में सदा के लिए यह समेट लीजिए कि रमजान के या किसी भी रोजे के दौरान नाक में दवाई लेने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इससे रोजा टूट जाता है। क्योंकि रोजा का एक नियम है कि अगर कोई भी चीज गले तक पहुंच जाए तो रोजा टूट जाता है। यही वजह है कि जब हम आंखों में, गले में और कानों में दवा या तेल डालते हैं तो वह किसी न किसी रूप में गले तक पहुंच जाती है। और जब गले में पहुंच जाती है तो नियम के मुताबिक रोजा को भी तोड़ देती है। ऐसा इसलिए कि नाक, कान और आंखों  का तात्लुक भी गले से होता है। इसलिए रोजे के दौरान आप को आंखों ड्राप डालना जरूरी भी है तो समय में परिवर्तन कर लें। रोजे के बाद पहला ड्राप डालें। सोने से पहले ड्राप डालें और सुबह सेहरी खाने के बाद ड्राप डाल लें। यही नियम गले और कान के बीमारों पर भी लागू होता है। हां रोजे के दौरान आप आंखों में सूरमा लगा सकते हैं। आंखों में सूरमा लगाने से रोजा नहीं टूटता है। उसी तरह आप सिर में तेल या कोई दवा भी लगा सकते हैं। रमजान के दौरान सिर में तेल लगाने और दवा लगाने से रोजा नहीं टूटता है। आप रमजान के दौरान सिर में शेंपू भी कर सकते हैं। इससे रोजा नहीं टूटता है।

कभी-कभी रोजे के दौरान कई बार रोजेदार भ्रम की स्थिति में हो जाता है। जैसे कुछ लोगों में रोजा के दौरान थूक निगल जाने की हालात पेश आ जाती है। और उन्हें यह खौफ सताते लगता है कि कहीं हमारा रोजा तो नहीं टूट गया। और इसी के साथ वोे अपने रोजे को लेकर फिक्रमंद हो जाते हैं। दरअसल इससे रोजा नहीं टूटता है। रोजा का नियम बताता है कि मुंह के अंदर का थूक गले में चला जाता है तो रोजा नहीं टूटता है। लेकिन वह आदमी अपने गले में नमी लाने के लिए इस तरह की हरकत की है तो इस वजह से उसका रोजा टूट जाएगा।

आप रोजे की शिद्दत और मौसम की गर्मी से परेशान होकर अगर बार-बार अपने सिर पर पानी डालते हैं। बार-बार चेहरा धोते हैं। बार-बार नहाते हैं यानी काफी देर तक पानी में ही रहते हैं तो इससे रोजे पर आपके कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इन सारे हालातों में भी आपके रोजे महफूज रहेंगे। यानी रोजे के दौरान कभी भी हाथ-पांव, सर व चेहरा धो सकते हैं। किसी भी वक्त नहा सकते हैं। सिर्फ ध्यान इतना रखना है कि वह पानी पाक-साफ हो।

टूथपेस्ट को लेकर बहुत ज्यादा भ्रम की स्थिति रहती है। कुछ लोग रमजान के दौरान और रोजे की मियाद में भी टूथपेस्ट का इस्तेमाल करते हैं। और कुछ लोग इस तरह के इस्तेमाल से परेशानी भी महसूस करते हैं। जाहिर सी बात है कि इस दो नजरिए की वजह से आम मुसलमान गोमगो यानी द्वंद्व की स्थिति में होते हैं। इसलिए इस पर खुलकर बात करने की जरूरत भी सामने आती है। दरअसल यह सही है कि रोजा रखने के दरम्यान टूथपेस्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि रोजे में टूथपेस्ट के इस्तेमाल से रोजा टूट जाता है। लेकिन जब हम इसे रोजे के सिंद्धांतों और उसकी कसौटी पर कसने की कोशिश करते हैं तो पाते हैं कि अगर कोई शख्स जो रोजेदार है और उसने रोजे के दौरान टूथपेस्ट का इस्तेमाल किया। और उसके इस टूथपेस्ट के इस्तेमाल के बाद टूथपेस्ट मुंह से होता हुआ गले तक पहुंच गया तो मानिए कि रोजा टूट गया। अगर टूथपेस्ट इस्तेमाल के बाद गले तक नहीं पहुंचा और इसका टेस्ट भी कुछ ज्यादा देर तक मुंह में नहीं रहता तो रोजा नहीं टूटता। टूथपेस्ट के इस्तेमाल से होने वाली स्थिति इतनी बारीक है कि इसे आम आदमी के लिए बहुत ही पेचीदा है। जाहिर है इसलिए रोजेदारों को चाहिए कि वह इस पचरे से निकलने की कोशिश करें यानी रोजे के दौरान टूथपेस्ट का इस्तेमाल ही नहीं करें। इसे दूसरे विकल्प मिस्वाक, दातून पर गौर करें। और इसी का इस्तेमाल करें। मुसलमानों को टूथपेस्ट से रोजे के दौरान गुरेज करने की जरूरत है।