दूसरा मत का 20 साला सफर

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संजीव श्रीवास्तव

आज के दौर में जब पत्रकारिता के आगे कई तरह की चुनौतियां हैं, उस दौर में दूसरा मत का उन्नीस साल का अनवरत सफ़र सुकूनदायक  पड़ाव है।

कोराना काल ने स्थापित मीडिया हाउसों को जड़ से हिला दिया। बड़े-बड़े समूह के प्रकाशन, संस्करण बंद हो गये, चैनल प्रभावित हुये, कार्यकर्ता-पत्रकार बंधु नौकरीविहीन हो गए, यह हृदयविदारक पल था। कोई अनुमान भी कभी नहीं लगा सकता था कि ये बड़े घराने अपने लोकप्रिय बांड का शटर गिरा देंगे। लेकिन कोरोना काल में जैसे कई जीवन असमय काल कवलित हुए कुछ उसी प्रकार इन प्रकाशन उद्योगों की शाखाएं भी अपनी जड़ों से अलग हुईं, सूखी, मुरझाईं और उन्हें बेरहमी से काट दिया गया।

अब यह कह पाना मुश्किल लगता है कि क्या वाकई वर्तमान घाटे या भविष्य में घाटे का सामना से घबराकर उनको बंद किया गया? क्योंकि टर्नओवर का रिकॉर्ड तो कुछ और कहानी कहता है!

आज से पच्चीस साल पहले प्रिंट मीडिया केवल बिक्री और विज्ञापन से चला करते थे, तब उनके दफ्तर में प्रूफ रीडिंग, ले-आउट से लेकर, कंपोजिंग के अलग-अलग विभाग होते थे. और उनके लिए अलग-अलग कार्यकर्ता होते थे जिनकी वेतनमान की सैलरी होती थी। लेकिन आज जबकि प्रिंट मीडिया के सामने बिक्री और विज्ञापन के अलावा डिजिटल संस्करणों, पोर्टलों आदि से भी विज्ञापन की कमाई के रास्ते खुल चुके हैं और परंपरागरत विभागों का मर्जर हो चुका है। मसलन सब-एडिटर ही कंपोजिटर, प्रूफ रीडर और ले-आउट डिजाइनर भी हो गया तो यह बात गले से नहीं उतरती कि कर्मियों की नौकरी ठेके पर एकमुश्त राशि वाली क्यों हो गई? ऊपर से घाटे का रोना-धोना।

बहरहाल ऐसे संकट भरे समय में ए आर आजाद जी की जिद और जुनून ही कहिए कि दूसरा मत पत्रिका शानदार उन्नीस साल का सफर पूरा कर बीसवें साल की ओर अग्रसर हुई है। यह केवल संपादक-प्रकाशक नहीं बल्कि उस स्वस्थ पत्रकारिता की सेहत के लिए भी प्रसन्न करने वाली खबर है, जिसके लिए ए आर आजाद की जिजीविषा और उनके भीतर का पत्रकार बधाई के पात्र हैं।

मैं इस शानदार रचनात्मक सफर को और आगे ले जाने के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।

सादर

संजीव श्रीवास्तव

(लेखक, पिक्चर प्लस के संपादक हैं)

बहरहाल ऐसे संकट भरे समय में ए आर आजाद जी की जिद और जुनून ही कहिए कि दूसरा मत पत्रिका शानदार उन्नीस साल का सफर पूरा कर बीसवें साल की ओर अग्रसर हुई है। यह केवल संपादक-प्रकाशक नहीं बल्कि उस स्वस्थ पत्रकारिता की सेहत के लिए भी प्रसन्न करने वाली खबर है, जिसके लिए    ए आर आजाद की जिजीविषा और उनके भीतर का पत्रकार बधाई के पात्र हैं।