बीजेपी की 50 साल की सत्ता वाली राजनीति का अनोखा सच!

316

अखिलेश अखिल

मौजूदा समय में बीजेपी की सरकार कहां-कहां है? 2014 से बीजेपी का ग्राफ़ कितना बढ़ा है और बीजेपी की मंजि़ल क्या है?  ये ऐसे सवाल है जो बीजेपी की दौड़ती कहानी का बयान करती है। कहने को तो चारों तरफ़ बीजेपी ही बीजेपी है लेकिन सच यह नहीं है। बीजेपी की हालत पहले से ख़राब हुई है और कई जगह से पैदल भी हुई है। हां, इतना ज़रूर है कि बीजेपी लम्बे समय तक की राजनीति कर रही है। तभी दो साल पहले अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी 50 साल तक शासन करने आई है। हालांकि तब विपक्ष ने शाह के इन बयानों की हंसी उड़ाई थी। लेकिन इतना तो साफ़ हो गया है कि बीजेपी भले ही कई राज्यों में आज भी संघर्ष कर रही है, लेकिन उसका जनाधार काफी बढ़ गया है। आज़ाद भारत के इतिहास में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी हो गई है और अब इसका जनाधार शहरों से आगे गांव तक पहुंच गया है। बीजेपी का यह विस्तार कांग्रेस के लिए तो बर्बादी के सामान ही है। बीजेपी के उत्थान के साथ ही कांग्रेस का जमींदोज होना आज की हकीकत है। कल क्या होगा कौन जाने ! क्योंकि राजनीति संभावनाओं का खेल है और यह समय के साथ बदल जाता है।

     मौजूदा समय में बीजेपी की सरकार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, गोवा और असम यानी 12 राज्यों में स्थित है। इन राज्यों में बीजेपी की सरकार है और बीजेपी के सीएम हैं। वहीं मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम और बिहार यानी उत्तर पांच राज्यों में वह सरकार में सहयोगी है। बिहार में तो जदयू को पछाड़ कर वह अब आगे जा चुकी है। कहने को नीतीश कुमार सरकार के मुखिया हैं लेकिन सरकार की चाबुक अब बीजेपी के हाथ में है। कह सकते हैं कि पहली दफ़ा नीतीश कुमार को कठपुतली सीएम कहा जा रहा है।

    याद कीजिए तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के उस बयान को जब 2019 के चुनाव के लिए 110 दिनों की यात्रा पर निकले थे और देश के हर हिस्से में जाकर बीजेपी का जनाधार बनाया था। पार्टी को मज़बूत किया था। अपनी चुनावी यात्रा के दौरान तब वे भोपाल में थे और बहुत कुछ बोल गए थे। उन्होंने  कहा था कि भारतीय जनता पार्टी पांच-दस नहीं, बल्कि 50 साल के लिए सत्ता में आई है, और यह भाव कार्यकर्ताओं के भीतर होना चाहिए। तभी देश में आमूलचूल परिवर्तन संभव है। भोपाल के तीन दिनों के दौरे पर पहुंचे  शाह ने पार्टी के कोर ग्रुप के सदस्यों, प्रदेश पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों व जि़ला अध्यक्षों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा था,  ‘‘संगठन के कार्यकर्ताओं को अब आराम करने का अधिकार नहीं है। इस राष्ट्र में आमूलचूल सकारात्मक परिवर्तन देखना चाहते हैं तो हमें बिना थके, बिना रुके अपनी दिशा में आगे बढ़ते रहना है।’’ उन्होंने फिर कहा, ‘‘हम सत्ता में 5-10 साल के लिए नहीं, कम से कम 50 साल के लिए आए हैं। इस मानस के साथ ही हमें आगे बढ़ते जाना है और इस विश्वास के साथ आगे बढ़ना है कि 40-50 साल की सत्ता के माध्यम से इस राष्ट्र में एक व्यापक परिवर्तन हम खड़ा करेंगे।’’

अमित शाह ने आगे कहा, ‘‘हमारे पास आज केंद्र्र में पूर्ण बहुमत की सरकार है।  330 सांसद और 1387 विधायक हैं।  हमें आज पार्टी सर्वोच्च स्थान पर दिखाई देती है। लेकिन 2014 की विजय को भी उत्कृष्ट कार्यकर्ता सर्वोच्च नहीं मानता है, इसलिए हमें इससे बहुत आगे जाना है।’’

 तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उपस्थित कार्यकर्ताओं से आह्वान किया था, ‘‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कामरूप से कच्छ तक कोई बूथ ऐसा नहीं रहे, जहां हम न हों। देश ने हमारे ऊपर बहुत भरोसा किया है, इसलिए हमें भी अपने नागरिकों के भरोसे पर खरा उतरना है।’’

शाह ने कहा कि पार्टी के भीतर विभाग और प्रकल्पों की रचना बदलते दौर की मांग पूरी करने का उत्कृष्ट माध्यम है। इन विभागों और प्रकल्पों की सक्रियता और दिशा, पार्टी को अंत्यत सुखद अनुभूति प्रदान करेगी। शाह के ये बयान भले ही विपक्ष को ठीक नहीं लगा हो लेकिन बीजेपी के लोगों ने शाह के बयान को स्वीकारा और फिर 2019 के चुनाव में जो कुछ भी हुआ, वह सब देश के सामने है। कह सकते हैं कि मोदी सरकार ने अपने पहले टर्म में कोई बड़ा काम नहीं किया था। लेकिन जनता ने फिर मोदी सरकार को ही स्वीकारा।  सत्य यही है। देश का सेक्युलर मिजाज़ कब धर्मांध होता गया, किसी को पता भी न चला। आज देश के भीतर भगवा राष्ट्रवाद कुलांचे मार रहा है। जबकि सच्चाई यही है कि चीन हमारे साथ खेल कर रहा है। हमपर क़ब्ज़ा कर रहा है लेकिन हम मौन है। मोदी भगत मीडिया के रूप में शुमार अर्नब गोस्वामी की हालिया चैट को अगर सही माने तो 2019 के चुनाव में अगर पकिस्तान के साथ तनाव बीजेपी की जीत का बड़ा कारण दीखता ह,ै तो इससे यह साफ़ हो जाता है कि देश का मिजाज़ अब बदल गया है और वह सेक्युलर मिजाज़ को तिलांजलि भी दे रहा है।

      शाह ने उसी भोपाल की सभा में कुछ और बातें कही थी। शाम को समन्वय भवन में आयोजित ‘नया भारत मंथन’ कार्यक्रम में शाह ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर जमकर हमला बोला था।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है। वहां सोनिया गांधी के बाद अध्यक्ष कौन होगा? सब जानते हैं। मगर भाजपा में अमित शाह के बाद अध्यक्ष कौन होगा, यह कोई नहीं बता सकता। क्योंकि भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र है। शाह ने आगे कहा था, ‘‘कांग्रेस वह दल है, जिसमें आंतरिक लोकतंत्र मर गया है। वह देश के लोकतंत्र की सेवा नहीं कर सकती है। देश में 1650 से ज़्यादा दल आज़ादी के बाद पंजीकृत हुए हैं, मगर भाजपा के अलावा कुछ पार्टियां ही ऐसी हैं, जिनमें आंतरिक लोकतंत्र है। ’’

अब यह जांच का विषय है कि बीजेपी कितना लोकतांत्रिक है। सच यही है कि बीजेपी मोदी और शाह के सिवा कुछ भी नहीं। किसी की मजाल नहीं कि इन दो लोगों के सिवा कोई तीसरा व्यक्ति कोई निर्णय ले ले। सच यही है कि आज किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी के कई नेताओं के भीतर भी ़गुस्सा है लेकिन किसी की मजाल नहीं कि वह कुछ बोल सके। फिर लोकतंत्र की कहानी बेकार की बातें हैं।

बीजेपी की हालिया कहानी अब बहुत कुछ कहती है। झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी के लिए दिक्क़त बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर बीजेपी शासित राज्यों के तुलनात्मक नक़्शे शेयर किए गए हैं। पिछले  साल महाराष्ट्र के बाद  झारखंड से भी बीजेपी के सत्ता से बाहर हो गई। बीजेपी देश के 21 राज्यों में शासन से 16 राज्यों तक में सिमट गई है। हालत यह है कि बीते साल के मुक़ाबले देश के कई राज्य उसके हाथों से निकल चुके हैं। राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सरकार गंवाने के बाद अब झारखंड की सियासत से भी भगवा रंग उतरना बहुत कहता है। फिर 50 साल की राजनीति कहां होती दिख रही है। अगर केंद्र्र में 50 तक बीजेपी टिके रहने का ख़्वाब देख रही है तो शायद यह भी संभव नहीं, क्योंकि जनता का मिजाज़ कब बदल जाता है भला कौन जनता है? इसी देश में लोगों ने इंदिरा को गले लगाया। औक़ात दिखाया। बाजपाई भी आए लेकिन उनका लम्बा खेल नहीं चला। मनमोहन सिंह आए। बहुत कुछ किया उन्होंन।े लेकिन वे भी चलता हो गए। फिर यह बीजेपी की क्या औक़ात है ? ऐसे में बीजेपी देश के नक़्शे से जिस तरह से ग़ायब हुई है, उससे पता चलता है कि बीजेपी अपनी जंमीं को आज भी संवार रही है। लेकिन काम होता नहीं दिख रहा। बिहार में मिली भारी सीट के बाद बीजेपी बंगाल पर नज़र गड़ा  रखी है। संभव है कि उसे लाभ भी मिल जाए लेकिन देश की राजनीति और सत्ता सरकार में अंगद की तरह पैर भला कौन जमा सकता है? बीजेपी तो कम से कम हरगिज़ नहीं। नक़्शे से पता चलता है कि बीजेपी ने कितना बड़ा राजनीतिक हिस्सा गंवा दिया है। मार्च, 2018 में बीजेपी देश के कुल 21 राज्यों में शासन कर रही थी। उससे बाद कई राज्यों में वह सत्ता गंवाने लगी। यह सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। दो साल पहले ही जम्मू-कश्मीर से लेकर आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश तक में शासन करने वाली बीजेपी, देश के राजनीतिक नक़्शे पर तेज़ी से सिमटती जा रही है। मौजूदा हालत यह है कि बीजेपी देश के बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश में अकेले और बिहार में जेडीयू के साथ मिलकर सरकार चला रही है। और अब मध्यप्रदेश भी बीजेपी के हाथ में है।

    दिसंबर, 2017 में क्षेत्रफल की दृष्टि से बीजेपी देश के 71 फीसदी हिस्से पर शासन कर रही थी। दिसंबर, 2018 में यह घटकर 51 फीसदी रह गया था। दिसंबर, 2019 ख़त्म होने से पहले पहले महाराष्ट्र और झारखंड गंवाने के बाद बीजेपी देश के लगभग 37 फीसदी हिस्से पर शासन कर रही है। वहीं इन राज्यों में रहनेवाली आबादी की बात करें तो 2017 में बीजेपी लगभग 68 फीसदी आबादी वाले राज्यों में सरकार चला रही थी। अब उनके सरकार में रहने वाले राज्यों के घटने से आबादी के मामले वह 43 फीसदी हो गई है।