शिद्दत से याद किए गए आचार्य हाशमी

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पहली जनवरी, 2024 को वीरपुर प्रखंड अंतर्गत कुशलटोल (मुजफ्फरा) स्थित कवि अशांत भोला के आवास पर स्मृतिशेष हिंदी, मैथिली एवं उर्दू के लब्धप्रतिष्ठ कवि फजलुर रहमान हाशमी की 82वीं जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

पहली जनवरी, 2024 को वीरपुर प्रखंड अंतर्गत कुशलटोल (मुजफ्फरा) स्थित कवि अशांत भोला के आवास पर स्मृतिशेष हिंदी, मैथिली एवं उर्दू के लब्धप्रतिष्ठ कवि फजलुर रहमान हाशमी की 82वीं जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

ठिठुरती दुपहरी में अलाव की आंच तापते हुए उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने बड़ी शिद्दत के साथ आचार्य हाशमी जी को याद किया। विचार गोष्ठी में भाग लेते हुए चर्चित कवयित्री सुमन सिंह ने कहा कि हाशमी जी, जितने बड़े कवि थे, उतने ही बड़े एक नेकदिल इंसान भी थे। उनकी जन्मभूमि मुजफ्फरा के समाज में वे एक हास्यकवि के रूप में चर्चित व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी हाजिर जवाबी उनकी लोकप्रियता थी। जबकि उर्दू ,मैथिली और हिंदी की उनकी कविताएं आज भी साहित्य की धरोहर हैं।

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अशांत भोला ने हाशमी जी को सांप्रदायिक सद्भाव का साहित्यकार बताते हुए कहा कि फजलुर रहमान हाशमी ने अपने लेखन के जरिए भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक सरोकार को न सिर्फ दिशा देने का कार्य किया,बल्कि कीर्तिमान भी स्थापित किया। ऐसे हरदिल अजीज शायर ही युग-युग तक याद किए जाते रहे हैं। वे एक मामूली शिक्षक जरूर थे,किंतु साहित्य में उनका बड़ा कद था,जो सदा बना रहेगा। क्योंकि उन्होंने अपने अंदर गंगा-जमुनी तहजीब को जीवन भर जिंदा रखने का काम किया।

इस मौके पर बालकवि विनोद, सौरभ कुमार, उज्ज्वल कुमार, राकेश कुमार, मणि कुमार, सामीहा कुमारी,अंजली कुमारी आदि ने भी उन्हें याद करते हुए अपने-अपने विचार रखें।

दूसरा मत के लिए बेगूसराय से एस आर आज़मी की रिपोर्ट