यूपी विधानसभा चुनाव में महिलाओं की गूंज

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प्रियंका ने इस बार उत्तर प्रदेश की नब्ज को पकड़ लिया

रुफी शमा

प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में महिलाओं को अखाड़ा में उतारने का एक नया पहलू पेश किया है। उन्होंने 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देकर दूसरे और सत्तासीन दल के सामने एक गहरी चुनौती पेश कर दी है। दरअसल महिला वोटरों को साइलेंट वोटर की संज्ञा दी जाती है। कई बार यूपी और देश के दूसरे सूबों में इस साइलेंट वोटर ने करिश्माई तौर पर अपनी भूमिका अदा की है। प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में महिलाओं की ताकत का अंदाजा लगाकर जिस तरह से चुनावी खेल खेला है, उससे साफ जाहिर है कि इस बार यूपी में खेला होकर रहेगा। और जिसके साथ महिला मतदाता होंगी, सरकार उसी की बनेगी। इस राय से नहीं इत्तेफाक रखना उन लोगों के लिए भारी पड़ सकता है जो हकीकत से आंखें मुंदे रहना चाहते हैं।

गौरतलब है कि यूपी में चुनाव आयोग के मुताबिक महिला वोटरों की संख्या  छह करोड़ सत्तर लाख है। जानना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश में कुल वोटरों की संख्या 14.61 करोड़ (14,61,34,603) हैं। इसमें पुरुष वोटर 7.90 करोड़ (7,90,70,809) हैं और महिला वोटरों की संख्या 6.70 करोड़ है। यानी पुरुष वोटर से महिला वोटरों की संख्या महज 1.20 लाख ही कम है। इसका मतलब साफ है कि महिला जिसकी तरफ, सरकार उसकी। और यह फॉर्मूला कम से कम इस बार तो रंग लाने वाला है। इसलिए प्रियंका गांधी महिलाओं के एक नए अवतार के रूप में उभरी है, जिससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की स्थिति क्या होने वाली है?

कांग्रेस ने अपना चुनावी घोषणा-पत्र यूपी के लिए जारी करके सबके चौका दिया है। राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा ने घोषणा पत्र जारी किया। उनका एक सलोग्न हिट कर गया। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं।’

ठीक इसी तरह उन्होंने टिकट बंटवारे में महिलाओं को 40 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा कर सबको हतप्रभ कर दिया। इतना ही नहीं कांग्रेस ने सरकारी नौकरियों से लेकर टीचरों की नियुक्ति तक में भरोसेमंद करके यूपी के वोटरों के मन को छूने का भरसक प्रयास किया है।

इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के वादे पर साफ और सकून भरे लहजे में कहा कि हम खोखले वायदे नहीं करते। यूपी के युवाओं से बात करके उनके विचार इस मैनिफेस्टो में डाले हैं।

प्रियंका गांधी ने भी राहुल गांधी की तरह अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि हमने उत्तर प्रदेश के हर जिले के युवाओं से बात की है। इसका भर्ती विधान नाम दिया है। ऐसा इसलिए कि युवा के पास रोजगार नहीं है। कांग्रेस ने 20 लाख रोजगार दिलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह घोषणा-पत्र उत्तर प्रदेश में 7 करोड़ युवाओं की आकांक्षा का घोषणा पत्र है। इससे 20 लाख सरकारी नौकरी हम देंगे, जिसमें से 40 प्रतिशत महिलाओं को दी जाएंगी।
-परीक्षाओं में घोटालों को दूर करने की भी बात की गई है। सरकार से जो भरोसा टूटा है, उस विश्वास को बहाल करने का ज़िक्र भर्ती विधान में है। 20 लाख सरकारी नौकरियो में डेढ़ लाख प्राथमिक विद्यालय में खाली हैं। माध्यमिक में 38 हज़ार, उच्च में 8 हज़ार। डॉक्टरों के 6 हज़ार, पुलिस के 1 लाख का पद खाली।

उन्होंने आगे कहा कि 20 हज़ार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सहायिका के 27 हज़ार पद रिक्त हैं। संस्कृत विद्यालय में 2 हज़ार पद खाली हैं।

यह सब कैसे मुमकिन होगा। इसका भी उन्होंने सारा ब्योरा जनता और अपने वोटरों के सामने रख दिया। उन्होंने कहा कि एक जॉब कैलेंडर बनाया जाएगा, जिसमें परीक्षा की तारीख, रिज़ल्ट की तारीख और नियुक्ति की तारीख होगी।

उन्होंने रोजगार सृजन पर अपनी राय का इजहार करते हुए कहा कि स्टार्टअप के लिए 5,000 करोड़ रुपए का ‘सीड स्टार्ट उप फंड’ का प्रावधान किया जाएगा।, इसमें 30 साल से कम उम्र के उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी। बेसिक शिक्षा क्षेत्र में 1 लाख प्रधानध्यापक की कमी को पूरा किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के रिक्त 19300 पद और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए रिक्त 27100 पदों को भरा जाएगा।

कांग्रेस ने यूपी की जनता खासकर शिक्षित युवाओं को यातायात सुविधा प्रदान करके उनके मन को लुभाने की कोशिश की है। कांग्रेस के घोषणा-पत्र में साफ कहा गया है कि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के शुल्क माफ होंगे, साथ ही परीक्षा देने के लिए बस और रेल यात्रा मुफ्त होगी।

कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में कहा है कि रोजगार में 8 लाख महिलाओं को शामिल होंगी। महिलाओं को रोजगार के लिए सस्ते लोन मिलेंगे। महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा होगी। महिलाओं को टैक्स में छूट दी जाएगी। गरीब विधवा महिलाओं को एक हजार रुपए की मानसिक पेंशन दी जाएगी। कामकाजी महिलाओं के लिए यूपी के 25 शहरों में सुरक्षित और हाईटेक हॉस्टल बनाए जाएंगे। हर साल में 3 गैस सिलेंडर दिए जाएंगे। शिक्षा के लिए 12वीं की छात्राओं को स्मार्टफोन दिया जाएगा। ग्रेजुएट छात्राओं को स्कूटी देंगे। पुलिस में 25 फीसदी नौकरियां महिलाओं को देंगे। रेप केस में दस दिन में कार्रवाई नहीं होने पर अधिकारी निलंबन कानून बनाएंगे। महिलाओं के लिए स्वास्थ्य शक्ति केंद्र बनाया जाएगा, जिसे महिलाएं ही चलाएंगी।

 

दरअसल इसबार महिला विधायकों की संख्या 41 को पार नहीं कर पाई है। 2017 में बीजेपी के 35 महिला विधायक सामने आईं। कांग्रेस से भी दो महिलाएं विधायक बनीं। बीएसपी भी कांग्रेस की तरह दो महिला विधायक वाली पार्टी बनकर सामने रही। समाजवादी पार्टी महिला विधायक के मामले में कांग्रेस औऱ बीएसपी से आधी रही। यानी समाजवादी पार्टी की सिर्फ एक महिला विधायक हैं। ठीक समाजवादी पार्टी की ही तरह अपना दल की भी एक महिला विधायक हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में 405 सीटें हैं। और आधी आबादी के हिसाब से यह अबतक ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई हैं। उसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में महज 11 महिला ही यूपी से सांसद बन सकीं। जबकि यूपी में सांसदों की संख्या 80 हैं। इन 80 सांसदों में से बीजेपी के 8, कांग्रेस के 1, बीएसपी के 1 और अपना दल की 1 महिला सांसद हैं।

मालूम हो कि 2017 में कांग्रेस का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। उसे महज सात सीट मिले थे। जबकि बीएसपी को कांग्रेस से ज्यादा बढ़त मिली थी। बीएसपी के 19 विधायकों ने जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी को 47 सीटों पर सब्र करना पड़ा था। 312 सीटें बीजेपी को आई थी। अपना दल एस ने 9 सीटें जीतीं। वहीं ओ पी राजभर की भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी ने चार सीटों पर अपना कब्जा जमाया।