पश्चिम बंगाल में ममता, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु में कांग्रेस गठबंधन

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केरल में यथावत बनी रहेगी एलडीएफ़ सरकार


ए आर आज़ाद

देश के चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश का चुनाव संपन्न हो गया है। इस चुनाव को वोटिंग ने साफ इशारा कर दिया है कि कहां किसकी सरकार बनने जा रही है।

सबसे पहले पश्चिम बंगाल की बात करते हैं। देश व दुनिया की नजर इस चुनाव को लेकर पश्चिम बंगाल पर जमी है। पश्चिम बंगाल में बेतहाशा तमाशा के बावजूद वोटर प्रतिशत ने कह दिया है कि बीजेपी के हाथ कुछ ख़ास नहीं लगने जा रहा है।

अब एक नज़र डालते हैं पश्चिम बंगाल पर

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ। इस आठ चरणों के मतदान में वहां के मतदाताओं ने जिस तरह से विषम परिस्थितियों में भी घर से निकलकर कर वोटिंग की उससे साफ ज़ाहिर होता है कि पश्चिम बंगाल में मां, माटी और मानुष की फिर से जीत हो गई है। यानी ममता बनर्जी ने अपनी सत्ता की हैट्रिक लगा ली है। और वह पिछले चुनाव में मिली सीट के लगभग बराबर सीट ला रही है।

 

हम आपको बताते हैं कि दूसरा मत पश्चिम बंगाल में टीएमसी यानी ममता बनर्जी की पार्टी को सबसे बड़े दल के रूप में देख रहा है। ममता बनर्जी को 180 से 205 सीटें मिलने जा रही है। वहीं कांग्रेस को 25 से 45 सीटें मिलने की गुंज़ाइश बन चुकी है। लेफ्ट यानी सीपीएम को भी तक़रीबन 26 से 35 सीटें मिलती हुई दिख रही है। पश्चिम बंगाल में अपना विशाल, आदमक़द और विराट रूप पेश करने वाली बीजेपी को 08 से 33 सीटें मिलने की संभावना है। यानी पश्चिम बंगाल में बीजेपी के चुनाव प्रचार का दमखम वोटों में तब्दील होता नहीं दिखाई पड़ रहा है। मालूम हो कि बंगाल में विधानसभा के 294 सीटें हैं। और सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 148 है। और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस जादुई आंकड़ा को बड़ी आसानी से पार करती हुई और तेज़ी के साथ सरकार को बचाए और मज़बूती के साथ बनाए रखने में कारगर दिख रही है। बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल कोई सौगात लेकर नहीं आ रहा है। बल्कि पार्टी को संदेश देने जा रहा है कि शाख़ ए नाज़ुक़ पे जो आशियाना बनेगा, नापाएदार होगा।

असम में 126 सीटें हैं। बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है। इन 126 विधानसभा की सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान हुए। असम विधानसभा में कई प्रमुख दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों ने भी अपना मुक़द्दर आज़माया है। बीजेपी और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी सरकार बचाने और बनाने के लिए जमकर अपने हाथ-पांव मारे। बीजेपी ने भी अपनी सरकार को बचाए रखने के लिए हाथ-पांव मारे। लेकिन जिस तरह से उन्होंने अपना ध्यान पश्चिम बंगाल पर केंद्रित किया, उस तरह से असम पर उनका ध्यान और तव्जजोह केंद्रित नहीं हो सका। यह रिजल्ट उसी नतीजे की बानगी के तौर पर देखी जा सकती है।

असम के प्रमुख राजनीतिक दलों में कांग्रेस, बीजेपी, एआईयूडीएफ, बोडोलैंड फ्रंट, असम गण परिषद एवं अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं। 2021 में असम में सत्ता परिवर्तन की लहर हक़ीक़त में बदल चुकी है। कांग्रेस गठबंधन सत्ता पर क़ाबिज़ होने जा रही है। असम में कांग्रेस को 126 में से 36-46 सीटें मिलने की संभावना हैं। बीजेपी को सत्ता से बंचित होना पड़ रहा है। नतीजे में उसे सीटों का नुक़सान हो रहा है। असम में बीजेपी को 126 में से 22 से 26 सीट मिलने की संभावनाएं प्रवल हो रही हैं। इसी तरह बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को 13 से 20 सीटें मिलने जा रही हैं। और असम में बोडो लैंड फ्रंट को 10 से 17 सीटें मिलने जा रही हैं। असम बोडोलैंड फ्रंट भी एआईयूडीएफ की तरह कांग्रेस गठबंधन में हैं। बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली पार्टी असम गण परिषद को बीजेपी के साथ दोबारा चुनाव लड़ने का ख़मियाज़ा भुगतने का अंदेशा दिख रहा है। असम गण परिषद को इसबार 126 में से महज़ 04 से 11 सीटें ही मिलने की संभावाएं दिख रही हैं। इसी तरह असम के अन्य क्षेत्रीय दलों को भी 02 से 05 सीटों तक का तोहफ़ा मिलने की उम्मीद बनती हुई दिख रही है।

असम की ही तरह केरल विधानसभा भी छोटा विधानसभा है। लेकिन असम विधानसभा से इसकी संख्या 14 ज़्यादा है। यानी 140 विधानसभा वाले केरल को बहुमत के लिए 71 सीट की जरूरत है। यानी केरल के बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 है। केरल में एलडीएफ, यूडीएफ औऱ बीजेपी एआईएडीएमके के गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। यहां भी एन आर कांग्रेस बीजेपी गठबंधन के साथ है। इसी तरह जनता दल सेक्यूलर, एनसीपी और कांग्रेस चुनाव मैदान में अपने नसीब के सत्ते का ज़ायक़ा चखने के लिए बेक़रार है।

जो वोटिंग के बाद परिस्थिति बनी है। वह मौजूदा सरकार के अनुकुल दिख रही है। यानी केरल में यथावत सरकार बनी रहेगी। मतलब केरल में एलडीएफ का खूंटा इस बार नहीं उखड़ने की संभावना है। उम्मीद का आसमान साफ है। यहां एलडीएफ 140 में से 70-72 लाती हुई दिख रही है। केरल में बहुमत का आंकड़ा 71 है। यानी एलडीएफ बहुमत के आंकड़े के बहुत करीब है। एआईएडीएमके को यहां इस बार 140 में से 10 से 15 सीटें मिलने की ही उम्मीद जगी है। एन आर कांग्रेस को भी 05 से 11 सीटों पर सब्र करना होगा। अंदाज़ यही है कि इसबार जेडीएस को 04 से 08 सीटें मिलेंगी। उसी तरह एनसीपी को भी 03 से 05 सीटें मिलेंगी। कांग्रेस को 12 से 15 सीटें मिलेंगी और बीजेपी को 00 से 02 सीटें मिलने की संभावना बनती हुई नज़र आ रही है। कांग्रेस को 12-15 सीटें मिलने की संभावना है। कुल मिलाकर लब्बोलुआब यही है कि केरल की सरकार अपनी मौजूदगी को बरक़रार रखने में कामयाब हो गई है।

अब तमिलनाडु की करते हैं। पश्चिम बंगाल के बाद तमिलनाडु ही दूसरा बड़ा विधानसभा है, जहां 2021 में विधानसभा के चुनाव हुए हैं। तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटें हैं। और यहां किसी भी दल के लिए बहुमत का आंकड़ा 118 है। यहां मौजूदा एआईडीएमके की सरकार है। और वोट प्रतिशत ने इशारा कर दिया है कि मौजूदा सरकार की विदाई का बेला आ गया है। यानी मौजूदा सरकार सत्ता खाली कर रही है। यह सत्ता डीएमके गठबंधन के लिए खाली की जाने वाली है। यानी इस बार मौजूदा सत्तारूढ़ सरकार एआईएडीएके को महज़ 60-80 सीटें ही आती हुई दिख रही हैं। यहां बीजेपी का खाता खुलता नहीं दिख रहा है। डीएमके सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आ रही है। उसे लगभग 234 में से 155-160 सीटें आने की संभावना मज़बूत दिख रही हैं। यानी बहुमत के जादुई आंकड़ा को वह अकेले दम पर ही पार करती हुई नज़र आ रही है। हालांकि कांग्रेस भी बेहतर नहीं कर पाई है। वावजूद इसके उसे 10 से 15 सीटें मिलती हुई दिख रही है। तमिल और हिंदी फिल्म के मशहूर अभिनेता कमल हासन की पार्टी एमएनएम का भी खाता खुलता दिख रहा है। यानी उसे भी 05 से 10 सीटें मिलती दिख रही हैं।  और कुछ छोटे-मोटे दलों को भी 04 से 05 सीटें मिलने की संभावनाएं हैं।

अब बात पुडुचेरी की करते हैं। पुडुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है। यहां विधानसभा के 30 सीट हैं। यहां बहुमत का जादुई आंकड़ा 16 है। और बहुमत के इस जादुई आंकड़ा के बड़े क़रीब कांग्रेस दिख रही है। कांग्रेस में शामिल गठबंधन भी अच्छी सीट पाने में कामयाब दिख रहे हैं। बीजेपी के खाता खुलने के आसार दिख रहे हैं। बीजेपी 01 – 02 सीटें ला सकती है। कांग्रेस 14 – 16 सीटें ला रही है। उसी तरह कमल हासन की पार्टी भी 02 से 03 सीटें लाती हुई दिख रही है। एन आर कांग्रेस को 03 से 04 सीटें मिलती हुई नज़र आ रही है। डीएमके भी अपने वजूद को बचाए रखने में कामयाब दिख रही है। वे भी 05 से 09 सीटें ला सकती है। अन्य के खाते में 03 से 05 सीटें जा सकती हैं।

बहरहाल इन पांच विधानसभा का नतीजा 2 मई को निकल रहा है। उससे पहले दूसरा मत ने चुनाव से पूर्व अपना एक आकलन किया है। हमें उम्मीद है कि हमारा यह आकलन 2 मई के नतीजे से बहुत क़रीब होगा। पश्चिम बंगाल और केरल में सत्ता यथावत रहने की जो हमने संभावनाएं जताई है, वह कारगर होगी। यानी पश्चिम बंगाल में टीएमसी और केरल में यूडीएफ की मौजूदा सरकार दोबारा सत्ता पर क़ाबिज़ रहेगी। ठीक इसी बरअक्स असम और तमिलनाडु की सरकार की विदाई होने जा रही है। असम में कांग्रेस गठबंधन के आने की उम्मीद प्रबल है, तो तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन पूरी ताक़त के साथ सत्ता पर क़ाबिज़ होने जा रही है। देश का केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में बीजेपी गठबंधन के लिए सत्ता में आना बेहद मुश्किल दिख रहा है। सही और साफ लहज़े में कहा जाए तो पुडुचेरी में असम की ही तरह कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आ रही है।