वोटर का इशारा इसबार, केरल में मौजूदा सरकार

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ए आर आज़ाद

केरल में 2021 का विधानसभा चुनाव 6 अप्रैल को संपन्न हो गया। केरल में 70.4 फीसदी वोटिंग हुई। केरल में एक ही चरण में एक ही दिन मतदान समाप्त हो गया। केरल के भी नतीजे बाकी राज्यों के साथ 2 मई को निकलेंगे। केरल का मतदान प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनाव 2016 के ईर्द-गिर्द ही रहा। यानी 2016 के विधासभा चुनाव में 71 प्रतिशत हुआ था। यानी इसबार के चुनाव की वोटिंग प्रतिशत 2016 के चुनाव से लगभग 0.6 प्रतिशत कम है। इसका सीधा मतलब है कि केरल की जनता बदलाव नहीं चाह रही है। संभव है कि केरल में सरकार यथावत रहे। कुछ कम सीटों के साथ ही मौजूदा सरकार मौजूद रहे तो लोगों को आश्चर्य नहीं होगा। 2011 के विधानसभा चुनाव में केरल में 75.02 फीसदी वोटिंग हुई थी। और इस वोटिंग ने सरकार बदल रही है, इसका संदेश दे दिया था। इसी तरह केरल में 2014 के लोकभा चुनाव में लगभग 74.02 फीसदी वोटिंग हुई थी।

केरल के तिरुवनंतपुरम में वोटिंग के बाद कांग्रेस के लीडर शशि थरूर ने कहा कि एक सामान्य नियम है कि जब मतदान अधिक होगा तो यूडीएफ मजबूत होगा। वहीं बीजेपी कर्नाटक ईकाई के अध्यक्ष नलिन कुमार कटील ने दावा किया है कि केरल में इसबार बीजेपी कम से कम दस सीटें जीतेगी। गौरतलब है कि 2016 के विधानसभा चुनाव में केरल में बीजेपी ने खाता खोल लिया था। यानी उसकी एक सीट पर जीत हो गई थी।

गौरतलब है कि केरल विधानसभा में 140 सीटें हैं। और किसी भी दल या गठबंधन के लिए सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 71 है। केरल के पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2016 के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर चर्चा करें तो पाते हैं कि सीपीएम ने 58 सीटें जीती थी। दूसरे नंबर पर कांग्रेस थी। कांग्रेस को 22 सीटें मिली थीं। तीसरे नंबर पर सीपीआई थी। उसे 19 सीटें मिली थीं। 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 18 सीटें मिली थीं। केरल कांग्रेस एम ने 6 सीटें जीतकर अपना दमखम दिखाया था। जनता दल सेक्युलर को 3 सीटें मिली थीं। शरद पवार की पार्टी एनसीपी को 2 सीटें मिली थीं। और 2016 में बीजेपी ने भी अपना खाता खोल लिया था।