बिहार: बेगूसराय के सात सीटों पर नए नए चेहरे ने दस्तक दी

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एस आर आज़मी

  • जेडीयू और कांग्रेस का सफाया
  • महागठबंधन चार सीटों पर कामयाब
  • एलजेपी को मिली मटिहानी सीट
  • एनडीए के हिस्से महज़ दो सीट
  • दल बदलू और बाग़ियों का बंटाधार

17वीं विधानसभा का चुनाव बेगूसराय के लिए एक नई सौगात लेकर आया है। ज़िले के सात विधानसभा सीटों पर नए चेहरे ने दस्तक दी है। इस चुनावी महासंग्राम में एनडीए के घटक दल जेडीयू एवं महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस का सफाया हो गया है। मास्को का ़िकला कहलाने वाले बेगूसराय में सीपीएम ने दो सीटें हासिल कर अपने खोए जनाधार को फिर से स्थापित किया है। हालांकि सीपीआई और सीपीएम बछवाड़ा तथा मटिहानी से अपनी पराजय का दंश भी झेल रही है। बीजेपी ने बेगूसराय और बछवाड़ा सीट पर जीत का परचम लहराया है तो वहीं एलजेपी ने मटिहानी से विजयी होकर सूबे बिहार में एक स्थान प्राप्त कर अपनी लाज बचा ली है। आरजेडी साहेबपुर कमाल और चेरिया बरियारपुर सीट पर जीत दर्जकर अपनी धमक को बऱकरार रखा है। बछवाड़ा के पूर्व विधायक स्व. रामदेव राय के पुत्र शिव प्रकाश उर्फ ़गरीब दास पार्टी टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनावी समर में कूदे लेकिन सम्मानजनक वोट मिलने के बावजूद उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। उथल-पुथल के इस दौर में बीजेपी छोड़कर एलजेपी में गए पूर्व विधायक ललन कुंवर और रामानंद राम की स्थिति हास्यास्पद हो गई।

तेघड़ा और बखरी सीट से दोनों जमानत गंवा बैठे। आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल होकर चुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायक वीरेंद्र कुमार महतो को भी हार का सामना करना पड़ा। दल-बदल के बाद भी गहरे दलदल में फंस गए।

एलजेपी ने ज़िले की पांच सीटों पर टिकट देकर अपने प्रत्याशियों को उतारा लेकिन सिर्फ एक सीट मटिहानी पर कामयाबी मिली। विधानसभा चुनाव के इस पीच पर ज़िला परिषद की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा देवी, आरएलएसपी के सुदर्शन सिंह ने भी ़िकस्मत आज़माइश की लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में पप्पू यादव की पार्टी, प्लूरलस, बीएसपी, आरएलएसपी सहित कई अन्य छोटे दलों के बैनर तले प्रत्याशी उतारे गए लेकिन मामूल वोट पाकर ही उन दलों को संतोष करना पड़ा। कांग्रेस के खाते में मात्र एक बेगूसराय की सीट आई, जहां से पूर्व विधायक अमिता भूषण पर दोबारा पार्टी ने भरोसा किया। लेकिन उन्हें भी हार ने विधानसभा जाने से रोक दिया। बेगूसराय के सभी सातों सीटों पर बा़िगयों की एक बड़ी फौज भी खड़ी हुई, जिनकी मंशा चुनाव जितना नहीं बल्कि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को हराना था। हालांकि बा़िगयों की यह जमात अपनी मंशा में सफल नहीं हो पाई।

तेघड़ा विधानसभा से लाल परचम लहराने वाले कामरेड रामरतन सिंह ने ़करीब 50 हज़ार वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर सूबे बिहार में कीर्तिमान स्थापित किया। सत्ताधारी घटक दल जेडीयू के मज़बूत पिलर माने जाने वाले पूर्व विधायक नरेन्द्र कुमार सिंह उर्फ बोगो, पूर्व विधायक वीरेंद्र महतो, पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और प्रत्याशी अमर कुमार का विकेट धराशाही हो गया। मौजूदा परिदृश्य में ज़िला के चार सीटों पर महागठबंधन, दो सीटों पर बीजेपी और एक सीट पर एलजेपी का ़कब्ज़ा है। जेडीयू ़खेमा से बने बा़गी राजेश मुखिया ने लगभग 19 हज़ार से अधिक वोट लाकर चौंकाया। मटिहानी में सीपीआई के कुछ नेता सीपीएम को हराने में दिलचस्पी दिखाई। यही काम बेगूसराय में भी बीजेपी के लिए कुछ दलीय नेता ने किया।