April 15, 2026

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में अंबेडकर स्मृति व्याख्यान दिया

“लोकतांत्रिक संस्थाओं को संवाद, वाद-विवाद और रचनात्मक चर्चा के माध्यम से कार्य करना चाहिए”: उपराष्ट्रपति

“भारत का संविधान सबसे व्यापक लोकतांत्रिक दस्तावेजों में से एक है”: उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन

 

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के डॉ.आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में “राष्ट्र निर्माता के रूप में डॉ.अंबेडकर : विकसित भारत की ओर मार्ग” विषय पर द्वितीय डॉ. अंबेडकर स्मृति व्याख्यान दिया। उपराष्ट्रपति ने डॉ. आंबेडकर की जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपार कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने दृढ़ता, विद्वत्ता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से चुनौतियों को अवसरों में बदल दिया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डॉ. आंबेडकर का दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन की कुंजी है और उनका मानना था कि सच्ची स्वतंत्रता शिक्षा से ही शुरू होती है।

संविधान के निर्माण में डॉ. आंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि व्यापक विचार- विमर्श में अपने नेतृत्व के माध्यम से उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित एक समावेशी भारत की नींव रखी। उपराष्ट्रपति ने भारत के संविधान को विश्व के सबसे व्यापक लोकतांत्रिक संविधानों में से एक बताया।

आगे उन्होंने सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के बारे में डॉ. आंबेडकर के दृष्टिकोण की चर्चा की। उन्होंने लैंगिक समानता पर डॉ. आंबेडकर के प्रगतिशील दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए, समाज की प्रगति के मापदंड के रूप में महिला सशक्तिकरण पर उनके महत्व का स्मरण किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उपलब्धियों तथा महिला नेतृत्व वाले विकास को समर्थन देने वाली सरकार की पहलों पर प्रकाश डाला।

उपराष्ट्रपति ने डॉ. आंबेडकर के जीवन से जुड़े पंचतीर्थों के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये स्थल भावी पीढ़ियों के लिए स्थायी प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने नागरिकों से एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया, जो डॉ. आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सुधांश पंत, विद्वानों, गणमान्य व्यक्तियों और विशिष्ट भी मौजूद थे।

 

ब्यूरो रिपोर्ट दूसरा मत

 

 

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