कवि-कथाकर को समाज के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर रचना करनी चाहिएः डा अनिल सुलभ

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शैली-सम्राट राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह की मनाई गई जयंती

‘कथा-कार्यशाला’ का हुआ आयोजन

कथा में रोचकता और उद्देश्य की गम्भीरता आवश्यक है। कहानी का एक उद्देश्य पाठकों के मन का रंजन तो है, पर यही एक मात्र उद्देश्य नहीं, अपितु जिससे लोक-मंगल हो, समाज में गुणात्मक परिवर्तन हो, पाठकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े, यह है। अस्तु एक कवि-कथाकर को समाज के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर रचना करनी चाहिए। 10 सितम्बर, 2019 को पटना के बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में विगत 1 सितम्बर से आयोजित हिन्दी पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ के 10वें दिन, कथा-साहित्य में ‘शैली-सम्राट’ के नाम से विख्यात राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह की जयंती पर आयोजित ‘कथा-कार्यशाला’ की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने राजा साहेब को स्मरण करते हुए कहा कि महान कथा-शिल्पी राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह, कथा-लेखन में अपनी अत्यंत लुभावनी शैली के कारण, ‘शैली-सम्राट’ के रूप में स्मरण किए जाते हैं। उनकी निर्झर-सी बहती शोख़ और चुलबुली भाषा ने पाठकों को दीवाना बना दिया था। उनकी अत्यंत लोकप्रिय रही रचनाओं ‘राम-रहीम’ ‘माया मिली न राम’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘गांधी टोपी’, ‘नारी क्या एक पहेली’, ‘वे और हम’, ‘तब और अब’, ‘बिखरे मोती’  आदि में इसकी ख़ूबसूरत छटा देखी जा सकती है। डा सुलभ ने अपनी कहानी ‘सफ़ीना के भाई’ से उद्धरण लेकर कथा-सृजन की बारीकियों से अवगत कराया।

कार्यशाला में एक आचार्य की भूमिका में उपस्थित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी और वरिष्ठ साहित्यकार डा उपेंद्रनाथ पाण्डेय ने कथा-सृजन के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए, शिल्प, शैली, कथानक, कथोपकथन, भाषा, कथारंभ से लेकर, उसके विकास, पात्रों के चरित्र-चित्रण, उत्कर्ष और अंत तक की लेखन-विधि से प्रतिभागियों को परिचित कराया।

सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, डा मधु वर्मा, डा पूनम आनन्द, विभा रानी श्रीवास्तव, सागरिका राय, बच्चा ठाकुर, डा शालिनी पाण्डेय, डा मीना कुमारी परिहार, चंदा मिश्र, पूनम देवा, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, सदानन्द प्रसाद, ऋचा वर्मा, डा सुषमा कुमारी, सुजाता मिश्र, प्रेमलता सिंह, बाँके बिहारी साव, अरविंद अकेला, शैलेंद्र कुमार, यतीन्द्र नाथ, हिमांशु दुबे आदि ने राजाजी के प्रति भावांजलि अर्पित की।

मंच का संचालन प्रो सुशील कुमार झा ने तथा कृष्ण रंजन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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