जनकवि नागार्जुन को याद किया गया

514

बिहार के बेगूसराय जिले में प्रसिद्ध कवि नागार्जुन की 110 वीं जयंती मनाई गई। शहीद सुखदेव सिंह समन्वय समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षक नेता अमरेंद्र कुमार सिंह ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि बाबा नागार्जुन का हिंदी व मैथिली साहित्य में समान रूप से योगदान रहा है। उनका उदारवादी व राष्ट्रवादी व्यक्तित्व और सामाजिक संघर्ष और देशकाल की चिंता उनकी रचनाओं में दिखती रही है।

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एवं बेगूसराय नगर निगम के पूर्व मेयर आलोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि कबीर का सम्मान पाने वाले बाबा नागार्जुन स्वाधीन भारत के प्रतिनिधि जनकवि के रूप में पहचाने जाते हैं। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। हालांकि वे मैथिली साहित्य में यात्री के नाम से लिखते थे। उनकी रचनाओं में मिथिला की पूरी गंध थी। ऐसे महान पुरुष को मैं शत-शत नमन करता हूं।

इस अवसर पर भोजपुरी अभिनेता अमिय कश्यप ने कहा कि बाबा नागार्जुन प्रगतिशील लेखक और कवि थे। वहीं कला मंच के जिला अध्यक्ष बबलू आनंद ने कहा कि बाबा नागार्जुन रूढ़िवादी विचारधारा के घोर विरोधी थे। उन्होंने कबीर की तरह ही अपनी सपाट काव्य रचनाओं के माध्यम से तत्कालीन भारतीय समाज का चित्र खींचा है। साहित्यकार डॉ चंद्रशेखर चौरसिया ने कहा कि बाबा नागार्जुन जनमानस कवि थे। प्रकृति से घूमक्कड़ और मत और विचार से मार्क्सवादी थे। इंजीनियर आलोक कुमार ने कहा कि नागार्जुन बिहार की धरती से जुड़े हुए स्वतंत्रा सेनानी और कवि थे। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से बिहार की जनता को प्रेरणा दी।

कार्यक्रम को जेपी सेनानी के जिला अध्यक्ष राजेंद्र महतो अधिवक्ता, महिला सेल सचिव सुनीता देवी, खुशी सिंह, अनाया गौतम, छात्र अनिकेत कुमार पाठक, सुशील कुमार राय आदि ने भी संबोधित किया।

इस दौरान नागार्जुन की पुत्री और शिक्षिका मंजू देवी एवं  फिल्म कलाकार व संगीतकार बबलू आनंद को सम्मानित किया गया।

एस आर आज़मी