August 28, 2026

Doosra Mat

www.doosramat.com

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के कंप्लायंस में सूचना देने से किया इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व अवकाश प्राप्त सीजेआई से जुड़े प्रश्नों का जवाब देने से साफ इंकार किया है। देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 का सम्मान करते हुए बेगूसराय जिला के बरौनी शोकहारा निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट गिरीश प्रसाद गुप्ता को जो सूचना उपलब्ध कराई है- वह एक चौंकाने वाली है। सीपीआईओ ने पूर्व अवकाश प्राप्त सीजेआई से जुड़े प्रश्नों का जवाब देने से साफ इंकार कर दिया है।

आरटीआई एक्टिविस्ट गुप्ता के मुताबिक सीपीआईओ सह एडिशनल रजिस्ट्रार एस.के. कमलेश नूकला का जवाब संबंधित पत्र दिनांक-12 अगस्त, 26 उन्हें दिनांक-17 अगस्त 2026 को मिला। इस पत्र में मांगी गई सूचना को आरटीआई एक्ट 2005 के सैंक्शन 8 (1)(g) और 8(i)(j) के तहत छूठ के दायरे में रहने के कारण उसे देय नहीं होना बताया। दूसरी सूचना के संबंध में कहा कि मांगी गई जानकारी ना तो मौजूद है, और ना ही रखी जाती है। यह भी बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के माननीय जजों के कुल घरेलू यात्रा खर्च की जानकारी समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर है। तीसरी सूचना में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ऐसी कोई भी जानकारी नहीं रखी जाती है।

 

इस पत्र की एक प्रति उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली को भी भेजी है। यानी उन्होंने आयोग के आदेश का कम्प्लायंस करना बताया है, जो एक अहम बात है। आरटीआई एक्टिविस्ट गुप्ता ने यह भी कहा कि उन्होंने 08 अक्टूबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट को एक आरटीआई आवेदन भेज कर तत्तकालीन प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ के सितंबर, 2024 माह में तिरुपति मंदिर में पूजा अर्चना संबंधित यात्रा के लिए उनके आधिकारिक कार्यक्रम आदेश की छायाप्रती मांगी। और उस यात्रा के दौरान उन्होंने जहां-जहां यात्रा की उस मद में जितना-जितना सरकारी धन व्यय किया गया वो मांगा। और यात्रा के दौरान सुरक्षा एवं अन्य विशेष सुविधा व्यवस्था जैसे ठहराव, वाहन आदि पर जो भी व्यय किया गया, उसका पूर्ण ब्यौरा उपलब्ध कराने की भी मांग की। इसके साथ ही माननीय के उस यात्रा के दौरान जिन-जिन सरकारी तंत्रों का इस्तेमाल किया गया, उसका भी ब्यौरा मांगा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सीपीआईओ ने उनके तीनों प्रश्नों का सही-सही जवाब नियमों की आड़ में देने से इंकार किया है।

आरटीआई एक्टवीस्ट गुप्ता के मुताबिक 16 जुलाई, 2026 को केन्द्रीय सूचना आयोग की सुनवाई के दौरान मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने उपर्युक्त मांगी गई सूचना के आलोक में पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के सीपीआईओ के जवाब को आरटीआई अधिनियम प्रावधानों के अनुसार समुचित नहीं माना था। और उन्होंने सीपीआईओ को यह आदेश दिया था कि वह पुनः परीक्षण कर तथा अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत पुनरीक्षित जवाब अपीलार्थी को भेजे। लेकिन सीपीआईओ ने आदेश का अनुपालन तो किया, लेकिन समुचित जवाब नहीं दिया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट एवं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का आरटीआई एक्ट की धारा 8(i)(j) के संबंध में बिना ठोस कारण बताएं सूचना को रोकना या उसका बहाना बना कर इंकार करना आर.टी.आई. अधिनियम के तहत न्याय संगत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जनहित सर्वोपरि है प्रदेश पारदर्शिता से समझौता कदापि नहीं होगा। इस संबंध मे गुप्ता ने पुनः एक आरटीआई आवेदन 25 अगस्त, 2026 को सीपीआईओ को भेज कर माननीय न्यायालय से पारित उन आदेशों की छायाप्रती की मांग की है।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *