आरकेडी कॉलेज, पटना में एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम संपन्न
रामकृष्ण द्वारिका कॉलेज, पटना में एफडीपी सेल की ओर से आईक्यूएसी के तत्वावधान में “IKS Adaptation Through Learning and Mindfulness” विषय पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षण-पद्धतियों के साथ समन्वित करना एवं शिक्षकों में सजगता, चिंतनशीलता, नैतिक विवेक के साथ विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण की भावना को विकसित करना था।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक, उच्च शिक्षा, शिक्षा विभाग, बिहार प्रो. (डॉ.) एन.के. अग्रवाल ने कार्यशाला के विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या प्रो. (डॉ.) सीता सिन्हा ने की। आयोजन की समन्वयकता प्रो. (डॉ.) शैलजा सिन्हा ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) एन.के. अग्रवाल, निदेशक, उच्च शिक्षा, बिहार सरकार, अतिथि सम्मानित प्रो. अतुल आदित्य पांडेय, निदेशक, UGC-MMTTC, पटना विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) दिवाकर प्रसाद, प्राचार्य, बी.डी. कॉलेज, पटना, मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार सिंह, नोडल ऑफिसर, FDP Cell, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय तथा विशिष्ट वक्ता डॉ. शशि भूषण, सहायक प्राध्यापक एवं सहायक FDP नोडल ऑफिसर, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय उपस्थित थे।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक, उच्च शिक्षा, शिक्षा विभाग, बिहार प्रो. (डॉ.) एन.के. अग्रवाल ने केंद्रित विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने उपनिषद वाक्य “सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः” वाक्य से की। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का अर्थ केवल प्राचीन ग्रंथों को पढ़ना नहीं है। इसमें दर्शन, गणित, खगोल, चिकित्सा, कृषि, योग, साहित्य, कला सहित जीवन-दर्शन शामिल है। भारत सरकार का IKS Division भी इसे एक जीवंत परंपरा के रूप में देखता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) सीता सिन्हा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा के समन्वय को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
प्रो.(डॉ) शैलजा सिन्हा, समन्वयक, एफडीपी सेल, ने कार्यशाला की विशेष प्रवेश के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा में उक्त श्रवण, मनन, निदीध्यासन को आत्मसात कर शिक्षण में उसकी महत्ता को प्रतिपादित किया।
सम्मानित अतिथि प्रो. अतुल आदित्य पांडे ने एफडीपी कार्यक्रम की रूपरेखा बताई। और विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में इस प्रकार के कार्यक्रम के आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार सिंह ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों को वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में अपनाने के विभिन्न आयामों पर चर्चा की तथा गुरुकुल व्यवस्था में निहित उद्देश्य, ज्ञान की साधना एवं वर्तमान में इसके तारतम्य को बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित मूल्य, चिंतन, आत्म-अनुशासन एवं समग्र विकास की अवधारणाएँ आधुनिक शिक्षा को अधिक मानवीय, मूल्यपरक एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। वहीं डॉ. शशि भूषण ने कक्षा-कक्ष में सजगता, अनुभवात्मक अधिगम तथा विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की साथ हीं आई.के.एस एवं एन.ई.पी.-2020, शिक्षण में माइंडफुलनेस तथा कक्षा-अनुकूलन जैसे विषयों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. (डॉ.) शैलजा सिन्हा, डॉ. अमर कुमार, आई.क्यू.ए.सी समन्वयक एवं डॉ नवीन कुमार, सहसमन्वयक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन सचिवों के रूप में डॉ. आशीष कुमार, डॉ. निधि सिन्हा, डॉ. सरिता कुमारी एवं डॉ. सुशील कुमार ने कार्यक्रम के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। डॉ. अमर कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में कुल 50 प्रतिभागी उपस्थित हुए।महाविद्यालय के शिक्षकगण के अतिरिक्त अन्य महाविद्यालयों बी.डी.कॉलेज, पटना, बीएस कॉलेज दानापुर, गंगा देवी महिला कॉलेज पटना, एस.एन. सिन्हा कॉलेज, जहानाबाद, कॉलेज ऑफ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस, पटना, मगध विश्वविद्यालय बोधगया आदि के शिक्षकगण मौजूद थे।
