प्रो. सुनीता सिन्हा चांसलर्स नॉमिनी में शामिल, प्रिंसिपल ट्रांसफर कमेटी की मिली ज़िम्मेदारी
बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति की ओर से विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों के लिए चांसलर्स नॉमिनी की घोषणा की गई है। इसके तहत नालंदा कॉलेज, बिहार शरीफ की प्राचार्य प्रो. सुनीता सिन्हा को ट्रांसफर कमेटी फॉर प्रिंसिपल के लिए चांसलर्स नॉमिनी बनाया गया है।
राज्यपाल सचिवालय, बिहार लोक भवन, पटना से 6 अक्टूबर, 2026 को जारी पत्र में बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के तहत विभिन्न समितियों के लिए चांसलर्स नॉमिनी की सूची जारी की गई है। सूची में प्रो. सुनीता सिन्हा का नाम ट्रांसफर कमेटी फॉर प्रिंसिपल के लिए दर्ज है।

प्रो. सुनीता सिन्हा वर्तमान में नालंदा कॉलेज, बिहार शरीफ की प्राचार्य हैं। चांसलर्स नॉमिनी के रूप में नामित किए जाने के बाद अब वे प्रिंसिपलों से संबंधित ट्रांसफर मामलों के लिए गठित ट्रांसफर कमेटी फॉर प्रिंसिपल में अपनी भूमिका निभाएंगी।
प्रो. सुनीता सिन्हा के अनुसार, प्रिंसिपल की भूमिका केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लीडरशिप और रिस्पॉन्सिबिलिटी की भूमिका है। प्रिंसिपल को एक संस्थान के संचालन में एकेडमिक एक्सीलेंस, डिसिप्लिन और टीमवर्क को विशेष महत्व देना चाहिए। उनके अनुसार फैकल्टी और स्टूडेंट्स दोनों को साथ लेकर चलना संस्थान के विकास के लिए आवश्यक है।

निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर प्रिंसिपल का दृष्टिकोण ट्रांसपेरेंसी, कंसल्टेशन और इंस्टीट्यूशनल इंटरेस्ट को प्राथमिकता देने वाला होना चाहिए। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी शांत रहकर सॉल्यूशन-ओरिएंटेड अप्रोच अपनाने में प्रभावी नेतृत्व की महत्वपूर्ण विशेषता अपने अंदर पोषित करना चाहिए।
उनका स्पष्ट मानना है कि एक प्रिंसिपल को केवल एडमिनिस्ट्रेटर नहीं, बल्कि एकेडमिक लीडर और इंस्टीट्यूशन-बिल्डर भी होना चाहिए। ऐसे में चांसलर्स नॉमिनी के रूप में नई जिम्मेदारी के साथ प्रोफ़ेसर सुनीता सिंह का यह नेतृत्व दृष्टिकोण विश्वविद्यालय की समिति में उनकी भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाता है।
