अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत रत्न सम्मान से विभूषित हुईं प्रो. शैलजा सिन्हा
रामकृष्ण द्वारिका महाविद्यालय की प्रोफेसर एवं संस्कृत की विभागाध्यक्षा प्रो. ( डॉ) शैलजा सिन्हा को थाईलैंड के बैंकॉक स्थित शिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत संगोष्ठी में “अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया। भारत सरकार की ओर से संचालित संस्कृत अध्ययन केंद्र और ग्लोबल संस्कृत फोरम के संयुक्त तत्वाधान में हुई संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों ने भाग लिया। इसमें 300 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में भारत की राजदूत पुनीत अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रो. शैलजा सिन्हा को बैंकॉक के शिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय में संस्कृत अध्ययन केंद्र के संस्थापक और पहले निदेशक, पद्मश्री प्रो. (डॉ.) चिरापत प्रपन्दविद्या जी द्वारा सम्मानित किया गया।

प्रो.शैलजा सिन्हा को संस्कृत भाषा एवं साहित्य के संरक्षण, प्रचार-प्रसार, संवर्धन और उन्नयन के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन एवं समर्पित योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में उनके शोधपत्र – गुरुकुल से स्मार्ट क्लासरूम तक: डिजिटल युग में प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति का समावेश( From Gurukul to Smart Classroom adapting Ancient Indian Padagogy in Digital Native Era) की बहुत सराहना हुई। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सीता सिन्हा एवं सभी शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने उन्हें इस सम्मान पर बधाई दिया।

सम्मेलन का मुख्य विषय भारतीय ज्ञान प्रणालियां – संस्कृतियों एवं ज्ञान परंपराओं के बीच सेतु था। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक संदर्भ में भारतीय ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता को लेकर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना तथा विभिन्न देशों की संस्कृतियों एवं ज्ञान परंपराओं के बीच संवाद स्थापित करना था।
