September 12, 2026

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राजाजी की कथा-लेखन की लुभावनी शैली ने पाठकों को दीवाना बना दिया : डा अनिल सुलभ

जयंती पर याद किए गए राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह

 पत्रिका के लोकार्पण के साथ लघुकथा-गोष्ठी

 

पटना में 10 सितम्बर, 2026 को महान कथा-शिल्पी राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित समारोह और लघुकथा-गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि कथा-लेखन में अपनी अत्यंत लुभावनी शैली के कारण, हिन्दी कथा-साहित्य में ‘शैली-सम्राट’ के रूप में स्मरण किए जाते हैं। उनकी कहानियां अपनी नज़ाकत भरी भाषा और रोचक चित्रण के कारण, पाठकों को मोहित करती हैं। कहानी किस प्रकार पाठकों को आरंभ से अंत तक पढ़ने के लिए विवश कर सकती है, इस शिल्प को वो जान गए थे। इसीलिए वे अपने समय के सबसे लोकप्रिय कहानीकार सिद्ध हुए। उनकी झरना-सी मचलती हुई बहती, शोख़ और चुलबुली भाषा ने पाठकों को दीवाना बना दिया था। उन्होंने अपनी कहानियों में समय के सत्य, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को सर्वोच्च स्थान दिया।

उन्होंने आगे कहा कि, राजा जी हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के बड़े पक्षधर थे। अपनी भाषा में भी उन्होंने इसका ठोस परिचय दिया। उनकी कहानियों में उर्दू के भी पर्याप्त शब्द मिलते हैं। उनकी अत्यंत लोकप्रिय रही रचनाओं ‘राम-रहीम’ ‘कानों में कंगना’, ‘माया मिली न राम’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘गांधी टोपी’, ‘नारी क्या एक पहेली’, ‘वे और हम’, ‘तब और अब’, ‘बिखरे मोती’ आदि में इसकी ख़ूबसूरत छटा देखी जा सकती है। वे गांधी जी के आंदोलन में भी सक्रिय रहे। गांधी जी की प्रेरणा से ही उन्होंने गंगा-जमुनी भाषा का प्रयोग अपनी कहानियों में किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार प्रो समरेंद्र नारायण आर्य, डा पूनम आनन्द, डा पुष्पा जमुआर, विभारानी श्रीवास्तव, शमा कौसर ‘शमा’, इन्दु भूषण सहाय और मनोज उपाध्याय ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा राजाजी के साहित्यिक अवदानों को स्मरण किया।

कार्यक्रम में प्रयाग राज से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘गुफ़्तगू’ का लोकार्पण किया गया। ये अंक बिहार की साहित्यकार डा पूनम आनन्द के साहित्य पर केंद्रित है। का लोकार्पण किया गया।

इस अवसर पर आयोजित लघुकथा गोष्ठी में, अभिराम बुद्धवाहा ने ‘कबीर का लोटा’, डा पुष्पा जमुआर ने ‘मेरे लिए’, डा पूनम आनन्द ने ‘व्यापार’, विभारानी श्रीवस्तव ने ‘उत्तराधिकारी’, शमा कौसर ‘शमा’ ने ‘असली दौलत’, मनोज उपाध्याय ने ‘दहेज’ , इन्दु भूषण सहाय ने ‘अहंकार हारा’, अनुराग कुमार ने ‘भिखारी’, अमितेश राज ‘स्वच्छ पानी’ तथा कुमार इप्सित ने ‘भविष्य’ शीर्षक से लघुकथा का पाठ किया।

मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय एवं कृष्णरंजन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

हिन्दी-पखवारा के अंतर्गत आयोजित पुस्तक-चौदस-मेला में भी पुस्तक-प्रेमियों की संतोषजनक उपस्थिति रही। भगवान श्री राम का जन्म-वर्ष बतानेवाली पुस्तक ‘रामायण परिपथ बिहार’, ‘हिन्दी के प्रणम्य पुरुष’, पावन चरित डा राजेंद्र प्रसाद’ आदि पुस्तकें पाठकों का ध्यान खींच रही हैं। कई दुर्लभ पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की दीर्घा पर भी अच्छी उपस्थिति देखी जा रही है।

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