अपने ही लोग हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा बनने नहीं दे रहे हैं : सिद्धेश्वर
साहित्य, कला और चित्रकला के प्रति आपका समर्पण ही मुझे इस मंच से जोड़ता है : प्रियदर्शनी
पटना में 15 सितंबर, 2026 को भारतीय युवा साहित्यकार परिषद एवं अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका के तत्वावधान में आयोजित “हेलो फेसबुक संगीत एवं चित्रकला” कार्यक्रम के साहित्यिक एपिसोड-611 “सिद्धेश्वर की डायरी” में यूट्यूब के मंच से सिद्धेश्वर ने कहा कि आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाना और एक-दूसरे को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देना हमारे लिए चिंतन का विषय है। अपने ही देश में अपनी ही भाषा के लिए हम कई दशकों से लगातार हिंदी दिवस मना रहे हैं। और हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा बनाए जाने की आवाज उठाते आ रहे हैं?
सिद्धेश्वर ने कहा कि उनके विचार से सच्ची आजादी तब पूरी होगी, जब हिंदी को पूरे देश की राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता मिलेगी। हिंदी देश के विशाल भूभाग में बोली और समझी जाने वाली भाषा है।
इसके लिए केवल राजनेताओं को दोष देना भी उचित नहीं होगा। इसमें हमारी, यानी देश की जनता की भी जिम्मेदारी है।
अपनी डायरी में विस्तार से विचार करते हुए सिद्धेश्वर ने कहा कि ‘प्यार जगत’ पत्रिका के लिए एक साक्षात्कार के दौरान संपादक डॉ. बी. एल. प्रवीण से बातचीत में विख्यात साहित्यकार जैनेन्द्र कुमार ने हिंदी के विकास और आंचलिक भाषाओं को लेकर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए थे। उनके विचारों का आशय यह था कि जब भाषा की एकरूपता और व्यापक बोधगम्यता कमजोर होती है, तब उसकी राष्ट्रीय पहचान भी प्रभावित होती है।
इस अवसर पर प्रियदर्शनी श्रीवास्तव ने कलाकारों की सराहना की। एक छोटी-सी भेंटवार्ता में कलाकार प्रियदर्शनी श्रीवास्तव ने कहा कि कला और नृत्य के प्रति उनके रुझान ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। और इसमें उनके परिवार की अहम भूमिका रही।
अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी में प्रियदर्शनी श्रीवास्तव ने कहा कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से कई नए कलाकारों को मंच प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नए कलाकारों को मंच देना इस मंच की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संगीत, कला और साहित्य के प्रति सिद्धेश्वर का प्रेम ही उन्हें इस मंच की ओर आकर्षित करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि सभी की प्रस्तुतियाँ अद्भुत रहीं।
सप्ताह भर की प्रस्तुतियों को वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। सिद्धेश्वर के संयोजन एवं प्रियदर्शनी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में शामिल कलाकारों एवं साहित्यकारों में सर्वश्री विज्ञान व्रत, मधु कुमार श्रीवास्तव, प्रियदर्शनी श्रीवास्तव, सिद्धेश्वर, मुरारी मधुकर, अनीता रश्मि, जयंत, डॉ. नसमीन, नीतू सिंह, संजीव कुमार श्रीवास्तव, सपना चंद्रा, इंदु उपाध्याय, नलिनी श्रीवास्तव, नंदकुमार आदित्य, मीनाक्षी, रवि रंजन, नीलेश अयाची, आर्या श्री, निर्मला कर्ण, सुनीता राज प्रिया रानी, कृष्ण अजनबी, विजया कुमारी मौर्य, अनीता पांडया, निर्मल कुमार आदि की महत्वपूर्ण भागीदारी रही।
