एनसीसी निदेशालय एवं ग्रुप मुख्यालय भागलपुर को महंगा पड़ा सूचना कानून को हल्के में लेना
आयोग ने दी चेतावनी
अपीलकर्ता ने जुर्माना नहीं लगाने पर ज़ाहिर की नाराज़गी
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदक को 30 दिनों के अंदर सूचना नहीं देना, और उसे हल्के में लेना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन 9 बिहार बटालियन एनसीसी ओटीसी बरौनी को महंगा पड़ा है। केंद्रीय सूचना आयोग, नई दिल्ली ने इसके लिए सीपीआईओ की ओर से जवाब देने में निष्क्रियता जैसे आचरण के लिए सख्त चेतावनी दी है। और ब्रिगेडियर को निर्देशित किया है कि वे इस आदेश की प्राप्ति की तिथि से 7 दिनों के अंदर आयोग को सूचना दें। और साथ ही अपीलकर्ता को बिंदु वार उत्तर दें।

आदेश की एक प्रति अपीलकर्ता शोकहारा निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट गिरीश प्रसाद गुप्ता को दिनांक 23 अगस्त, 2026 को प्राप्त हुआ है। गुप्ता के मुताबिक इस मामले की सुनवाई दिनांक 11 अगस्त, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बेगूसराय मुख्यालय में हुई थी। जिसमें वे स्वयं अपरिहार्य कारणों से अनुपस्थित थे। वहीं उस सुनवाई में प्रतिवादी की ओर से ब्रिगेडियर अरुण यूनियल, सीपीआईओ और ग्रुप कमांडर भागलपुर, एनसीसी निदेशालय, ब्रिगेडियर अभिजीत शर्मा, उप महानिदेशक एनसीसी बिहार, झारखंड दिल्ली स्थित आयोग के न्यायालय कक्ष में उपस्थित थे।

गुप्ता के मुताबिक, उन्होंने दिनांक 28/11/2024 को आरटीआई आवेदन के जरिए बरौनी में 9 बिहार की एनसीसी ओटीसी को स्थापना तिथि एवं स्थापना तिथि से जितने भी छात्राओं को प्रशिक्षित किया गया और वर्ष के अनुसार भारत सरकार की ओर से प्रशिक्षण मद में जितना राजस्व प्राप्त हुआ, उसका पूर्ण ब्यौरा मांगा गया था। इसके साथ ही साथ जिस-जिस मद में यह व्यय किया गया है, उसका भी पूर्ण विवरण देने की मांग की गई थी। और बिहार बटालियन एनसीसी ओटीसी बरौनी के विकास का जो कार्य किया गया, उसका भी पूर्ण विवरण स्थापना कल से अध्यतन तक दिए जाने की मांग की गई थी। इस बीच जितना भी सरकारी राजस्व प्राप्त हुआ, उसका भी वार्षिक पूर्ण विवरण दिए जाने की मांग की गई थी। लेकिन मुझे 30 दिनों के अंदर सूचना नहीं दी गई। इसके बाद 30 दिनों के बाद उनके वरीय पदाधिकारी सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार उपमहा निदेशक राष्ट्रीय कैडेट कोर निदेशालय, बिहार- झारखंड राजेंद्र पथ, पटना के समक्ष प्रथम अपील दाखिल के बाद भी सूचना नहीं मिलने पर वे केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली में द्वितीय अपील दायर किया।

गुप्ता के मुताबिक, वे आयोग के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में यह प्रावधान है कि 30 दिनों के बाद सूचना नहीं दिए जाने के बाद संबंधित सीपीआईओ को 250 रुपए प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25000/- का जुर्माना लगाने का आयोग के पास अधिकार है। लेकिन आयोग ने इस मामले में सीपीआईओ का बचाव करते हुए सिर्फ उन्हें चेतावनी देते हुए सूचना को उपलब्ध कराने का आदेश जो दिया है- वह नियमानुसार उपयुक्त नहीं समझा जा सकता है। दरअसल अपीलकर्ता को सूचना मांगने प्रथम अपील एवं द्वितीय अपील दायर करने में अर्थ, समय और श्रम भी लगा है, जिसकी बर्बादी हुई है। और सूचना कानून का अनुपालन नही किया गया है।
